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Author: searchinglifez

केदार यात्रा से पहले सहारनपुर में अन्तिम दिन (6)

केदार यात्रा से पहले सहारनपुर में अन्तिम दिन (6)

अच्छा लिखना और लगातार लिखना मेरे जैसे प्रथम बार के लेखक के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। जैसे मै जब केदार यात्रा से आया तो पूर्ण रूप से पवित्र था। पर जैसे जैसे भौतिक दुनिया में रमता रहा मेरी पवित्रता समाप्त होती रही। अब मुझ जैसे नए नवेले ब्लॉग लेखक जिसे कभी कभार यही नहीं पता होता की वो ब्लॉग लिख क्यों रहा है तो बहुत मुश्किल हो जाती है। कभी लगता है जल्दी से ब्लॉग लिख डालूँ कम से कम…

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केदार यात्रा – सहारनपुर में पहला दिन(5)

केदार यात्रा – सहारनपुर में पहला दिन(5)

थैंक यू, आपको मेरी ब्लॉग अच्छी लग रही है। सालो से कोशिश कर रहा था। सब भोले बाबा की इच्छा। आख़िरकार ११ मई को, मै सहारनपुर पहुँच चुका था। सहारनपुर ऐतिहासिक जगह है। शायद आपको याद हो काकोरी काण्ड वाली ट्रेन। वो सहारनपुर से ही चलती थी। अच्छा मै जब छोटा था तब हरिद्वार भी सहारनपुर जिले का हिस्सा था। तब उत्तराखंड भी नहीं था सब उत्तर प्रदेश ही था। अरुण कुमार मिश्रा तब सहारनपुर जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होते थे। मेरे…

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मेरी पहली केदार यात्रा – पहला पड़ाव(4)

मेरी पहली केदार यात्रा – पहला पड़ाव(4)

एक बार दीदी बोली , कैसा यह सफर होता है। नए नए लोग मिलते है उनका भी एक जीवन क्रम होता है। मुझे मैट्रिक्स मूवी की याद आ रही थी। कैसे विश्व को बनाने वाला लोगों के जीवन को प्रोग्राम करता है। जैसे हम एयरपोर्ट से उतरे तो किसी ने बोला सामने ही एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन है। हमने जाने का रास्ता पूछा और हम मेट्रो स्टेशन के लिए चल पड़े। आधे रास्ते में ही टैक्सी वालो ने हमें गाइड और मिस गाइड दोनों ही किया।  हम…

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मेरी पहली केदार यात्रा – क्यों(3)

मेरी पहली केदार यात्रा – क्यों(3)

कभी कभी मुझे लगता है शायद दूसरों को भी लगता हो , कि मै एक ही इंसान हूँ या दो तीन।  मेरे में भी बहुत कमियाँ है।  सबसे बड़ी कमी “ना सुनना”। अच्छा मुझे पहाड़, ऊँचे ऊँचे पहाड़ पसंद है।  एक बार किसी ने मुझसे पुछा समुद्र तट या पहाड़।  बिना हिचक मैंने उसे बोला पहाड़। पहाड़ आपकी विल पावर की हर दूसरे मिनट में परीक्षा लेते है। जितना ऊपर आप पहुँचते है उतना ही सुन्दर दृश्य देखने को मिलता है।  और…

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मेरी पहली केदार यात्रा – यात्रा से पहले(2)

मेरी पहली केदार यात्रा – यात्रा से पहले(2)

घर पर बोला दोस्तों के साथ जाना है , फिर बोला नहीं बात नहीं बनी अब अकेले जाऊँगा। हिमालय की खोज अकेले की जाये। जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स को जिस प्रकार नीम करोली वाले बाबा मिले या कितने ही महापुरषों को हिमालय में ज्ञान मिला। कुछ तो होगा इस हिमालय में। अच्छा  डेकाथलान का नवी मुंबई में होना बहुत फायदेमंद रहा।  माँ की दी हुई आर्थिक सहायता से ट्रैकिंग का बहुत सा सामान जुटा लिया। सब सामानों की लिस्ट बनायी और कंप्यूटर…

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मेरी पहली केदार यात्रा(1)

मेरी पहली केदार यात्रा(1)

मेरा एक विपश्यी हैदराबादी मित्र है। वो और मै पहली बार ईगतपुरी में मिले थे। वह तब मुंबई में ही माइंड स्पेस में जॉब करता था।  हाल ही में उसे बैंगलोर में जॉब मिला था। व्हाट्सप्प से कभी कभार एक दूसरे को मैसेज भेज दिया करते थे। उसे पीठ के दर्द की समस्या थी विपश्यना के आखिरी दिन किसी ने उसे बोला था की पीठ दर्द के लिए ट्रैकिंग बहुत अच्छा स्पोर्ट्स है। वो मुझसे कई बार बोलता था ट्रैकिंग जाने के लिए। …

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